इतिहास में कई राजा और योद्धा हुए, लेकिन ग्रिगोरी रास्पुतिन (Grigori Rasputin) जैसा किरदार शायद ही कोई दूसरा हो। एक गरीब किसान का बेटा, जिसने रूस के सबसे ताकतवर शाही परिवार को अपनी उंगलियों पर नचाया। उसे “Mad Monk” (पागल साधु) कहा जाता था।
उसकी कहानी किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। जानिए रास्पुतिन की जिंदगी के वो किस्से जो आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं।

- महल में एंट्री: एक बीमारी और ‘जादू’
रास्पुतिन के पास न पैसा था, न कोई पद, फिर वह राजा (ज़ार निकोलस) के महल तक कैसे पहुँचा?
वजह: राजा के इकलौते बेटे, राजकुमार एलेक्सी को ‘हीमोफीलिया’ बीमारी थी (चोट लगने पर खून बंद न होना)।
चमत्कार: जब बड़े-बड़े डॉक्टर हार गए, तो रास्पुतिन आया। कहते हैं कि उसने बच्चे के पास बैठकर कुछ प्रार्थना की (या शायद सम्मोहन/Hypnosis किया) और बच्चे का खून बहना बंद हो गया।
नतीजा: महारानी अलेक्जेंड्रा को लगा कि रास्पुतिन भगवान का भेजा हुआ फरिश्ता है। बस फिर क्या था, रास्पुतिन रूस का ‘अनचाहा राजा’ बन गया। - दिन में संत, रात में शैतान
रास्पुतिन की लाइफस्टाइल सबसे ज्यादा विवादित थी। उसका एक अजीब फलसफा (Philosophy) था:
“भगवान के करीब जाने के लिए, पहले खूब पाप करो, ताकि बाद में सच्चे दिल से माफी मांग सको।”
इसी बहाने वह हर तरह का ‘पाप’ करता था।
वह शराब का बहुत शौकीन था।
रूस की अमीर घरानों की महिलाएं उसकी दीवानी थीं। कहते हैं उसकी आँखों में ऐसा सम्मोहन था कि लोग उसके वश में हो जाते थे।
जनता उसे नफरत करती थी क्योंकि एक तरफ सैनिक युद्ध में मर रहे थे, और दूसरी तरफ रास्पुतिन महल में अय्याशी कर रहा था। - वो मौत, जो आ ही नहीं रही थी (The Climax)
रास्पुतिन की जिंदगी से ज्यादा मशहूर उसकी मौत की कहानी है। 29 दिसंबर 1916 को रूस के कुछ रईसों (जिनमें राजकुमार युसुपोव शामिल थे) ने उसे मारने का प्लान बनाया। लेकिन यह इतना आसान नहीं था:
स्टेप 1 (जहर): उसे पार्टी में बुलाया गया और खाने (केक और वाइन) में सायनाइड (Cyanide) मिलाकर दिया गया। यह जहर इतना था कि 5 लोग तुरंत मर जाएं। रास्पुतिन ने सब खा लिया, लेकिन उसे कुछ नहीं हुआ! हत्यारे डर के मारे कांपने लगे।
स्टेप 2 (गोली): जब जहर ने काम नहीं किया, तो युसुपोव ने उसकी छाती में गोली मार दी। रास्पुतिन गिर गया। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
स्टेप 3 (ज़िंदा होना): जब युसुपोव बॉडी चेक करने गया, तो रास्पुतिन ने अचानक आंखें खोलीं, जोर से दहाड़ा और युसुपोव का गला पकड़ लिया। वह वहाँ से भाग निकला।
स्टेप 4 (नदी): उसे भागते हुए दोबारा 2-3 गोलियां मारी गईं (एक सिर में)। फिर उसके हाथ-पैर बांधकर उसे जमी हुई नेवा नदी के बर्फीले पानी में फेंक दिया गया।
हैरानी की बात: बाद में जब लाश मिली, तो पता चला कि रास्पुतिन के फेफड़ों में पानी था। यानी जहर और गोली खाने के बाद भी वह नदी के अंदर ज़िंदा था और साँस लेने की कोशिश कर रहा था। उसकी मौत डूबने से हुई थी। - रास्पुतिन का श्राप (The Prophecy)
मरने से कुछ दिन पहले, रास्पुतिन ने राजा को एक चिट्ठी लिखी थी, जो सच साबित हुई:
“अगर मुझे किसी आम आदमी ने मारा, तो राजा तुम सुरक्षित हो। लेकिन अगर मुझे तुम्हारे रिश्तेदारों (रईसों) ने मारा, तो 2 साल के अंदर तुम्हारा पूरा परिवार खत्म हो जाएगा।”
रास्पुतिन की मौत के ठीक 15 महीने बाद रूसी क्रांति हुई। ज़ार निकोलस, महारानी और उनके पाँचों बच्चों को एक तहखाने में गोलियों से भून दिया गया। रास्पुतिन का श्राप और रूस का साम्राज्य, दोनों का अंत एक साथ हुआ।
निष्कर्ष:
रास्पुतिन एक ढोंगी था या सच में उसके पास कोई शक्ति थी, यह आज भी एक रहस्य है। लेकिन एक बात तय है—इतिहास में उसके जैसा जिद्दी इंसान दूसरा नहीं हुआ जिसे मारने के लिए जहर, गोली और पानी… तीनों कम पड़ गए
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